Saturday, November 8, 2008

तुमको देखता है तो


तुमको देखता है तो बादल की आड़ ले लेता है
सोने सा नीर चमकाता लेकिन तुमसे घबराता है
सब उसको नमन करते लेकिन वो तुमको पूजता है
क्या तुमने देखा है सूरज भी तुमसे मोहब्बत करता है

कभी तुमसे नखरा करता, चुपचाप कभी हो जाता है
कभी हँसता, कभी घूरता, रुआंसा कभी हो जाता है
चांदनी को छोड़ के देखो वो सजदा तुम्हारा करता है
क्या सूरज की तरह चाँद भी तुमसे मोहब्बत करता है

वो संग संग तुमको तकते हैं
अंजलि में तुम्हारी बसर करने को तड़पते हैं
चेहरा दमकाते तुमपर प्यार लुटाते
रात दिन से छुपते-छुपाते
देखो तो मेरी तरह सब तारे भी तुमसे मोहब्बत करते हैं

चलता है, दौड़ता है, फ़िर तुम्हारे साथ रुक जाता है
तुम्हारी महक उधार लेता है, खिलखिलाता है, फ़िर दूर गाँव तक तुम्हारी बंदगी करता है
क्या देखा तुमने पवन तुमसे कितनी मोहब्बत करता है

तुम हंसती हो तो हँसता है, रोती हो तो रो देता है
तुम्हारे साथ ही तो अटखेली करता है
तुमको देख गाता गुनगुनाता, सीटी बजाता, कल-कल आवाज़ करता है
तुम्हारी बाहें छूकर मीठा होता
देखो तो नीर भी तुम ही से मोहब्बत करता है

दर्द


सब नश्वर है, सब खत्म हो जाता है, कुछ अगर नहीं जाता है तो बस दर्द नहीं जाता है
बीज पैदा होता है, पौधा बनता है, पौधा पेड़ और फ़िर वो चला जाता है
इंसान आता है, बड़ा होता है और फ़िर वो भी चला जाता है
कुछ अगर नहीं जाता है तो बस दर्द नहीं जाता है - वो हमेशा रहता है

आज मुझको, कल तुमको, फ़िर किसी और को
उसकी ना शक्ल है, ना सूरत, ना रूप ना कोई रंग

ना सामने दिखता है, ना पास बैठकर बात करता है
सिर्फ़ महसूस होता है – किसी को कम, किसी को बहुत सारा महसूस होता है
किसी का कुछ छीन लेता है तो किसी को कुछ दे जाता है
ज़्यादा वक्त के लिए जाता नहीं है कहीं, बस कभी कभी तुम्हारे पास ही आराम कर लिया करता है, फ़िर जाग जाता है और अपनी मौजूदगी दर्ज कराता है, महसूस कराता है

तुम्हारा कभी कोई सपना टूटे, कभी तुम्हारा कोई अपना छूटे
तो दर्द तुम्हारे पास कभी सीने का खंजर, कभी आँख का आंसू बनकर आ जाता है
कभी वो पहले भी आता है - तुम्हारे सपने चूर करता है, उम्मीदें खोखली करता है और फ़िर जब तुम्हारे पास कुछ नहीं रहता तो सिर्फ़ दर्द रह जाता है

सब नश्वर है, सब खत्म हो जाता है, कुछ अगर नहीं जाता है तो बस दर्द नहीं जाता है...

इजाज़त दो...


इजाज़त दो इस ज़मीन को कि तुम्हारे कदम चूमकर आसमां का दर्जा हासिल करे
इजाज़त दो इस हवा को कि तुम्हारे करीब से गुज़रकर ख़ुद को महका ले
इजाज़त दो इस फिज़ा को कि तुम्हे छूकर ख़ुद को रंग ले, इन पंखुडियों को कि तुम्हारे होंठ छूकर और सुर्ख हो जायें, इस दरिया के नीर को तुम्हारी बाहें धोकर और मीठा हो जाए


इजाज़त दो इन पहाडियों, वादियों, इन झरनों को कि तुम्हे अपने आगोश में लेकर धुल जाएँ
इजाज़त दो इस चाँद को कि तुम्हारी रौशनी ले सूरज कि दमक को भूल जाए
इजाज़त दो इस निशा को कि तुम्हारे केसुओं का स्पर्श कर और खूबसूरत हो जाए
इजाज़त दो सूरज कि इन किरणों को कि सर से पाँव तक तुम्हें चूमकर और पाक हो जाएँ

और इजाज़त दो मुझको...