इजाज़त दो इस ज़मीन को कि तुम्हारे कदम चूमकर आसमां का दर्जा हासिल करे
इजाज़त दो इस हवा को कि तुम्हारे करीब से गुज़रकर ख़ुद को महका ले
इजाज़त दो इस फिज़ा को कि तुम्हे छूकर ख़ुद को रंग ले, इन पंखुडियों को कि तुम्हारे होंठ छूकर और सुर्ख हो जायें, इस दरिया के नीर को तुम्हारी बाहें धोकर और मीठा हो जाए
इजाज़त दो इन पहाडियों, वादियों, इन झरनों को कि तुम्हे अपने आगोश में लेकर धुल जाएँ
इजाज़त दो इस चाँद को कि तुम्हारी रौशनी ले सूरज कि दमक को भूल जाए
इजाज़त दो इस निशा को कि तुम्हारे केसुओं का स्पर्श कर और खूबसूरत हो जाए
इजाज़त दो सूरज कि इन किरणों को कि सर से पाँव तक तुम्हें चूमकर और पाक हो जाएँ
और इजाज़त दो मुझको...
3 comments:
This is your best
Nice! Consultant turns poet and how!! Keep them coming Gulati ji, there is a fan club getting created here :)
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