Saturday, November 8, 2008
तुमको देखता है तो
तुमको देखता है तो बादल की आड़ ले लेता है
सोने सा नीर चमकाता लेकिन तुमसे घबराता है
सब उसको नमन करते लेकिन वो तुमको पूजता है
क्या तुमने देखा है सूरज भी तुमसे मोहब्बत करता है
कभी तुमसे नखरा करता, चुपचाप कभी हो जाता है
कभी हँसता, कभी घूरता, रुआंसा कभी हो जाता है
चांदनी को छोड़ के देखो वो सजदा तुम्हारा करता है
क्या सूरज की तरह चाँद भी तुमसे मोहब्बत करता है
वो संग संग तुमको तकते हैं
अंजलि में तुम्हारी बसर करने को तड़पते हैं
चेहरा दमकाते तुमपर प्यार लुटाते
रात दिन से छुपते-छुपाते
देखो तो मेरी तरह सब तारे भी तुमसे मोहब्बत करते हैं
चलता है, दौड़ता है, फ़िर तुम्हारे साथ रुक जाता है
तुम्हारी महक उधार लेता है, खिलखिलाता है, फ़िर दूर गाँव तक तुम्हारी बंदगी करता है
क्या देखा तुमने पवन तुमसे कितनी मोहब्बत करता है
तुम हंसती हो तो हँसता है, रोती हो तो रो देता है
तुम्हारे साथ ही तो अटखेली करता है
तुमको देख गाता गुनगुनाता, सीटी बजाता, कल-कल आवाज़ करता है
तुम्हारी बाहें छूकर मीठा होता
देखो तो नीर भी तुम ही से मोहब्बत करता है
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7 comments:
must have "some" inspiration to get to this line...
क्या सूरज की तरह चाँद भी तुमसे मोहब्बत करता है
Behind every successful poet there is "some" inspiration...
"some" ki guthee jald suljhayein Gulati sahab....
jahaan na pahuncha ravi, wahaan pahuncha kavi... likhte jaao, prabhu ke gun gaate jaao
Na jane ashk se aakho me kyo hai aaye hue,
Gujar gaya hai jamana aisi kavita sune hue.
Gulati - socha na tha eitna talent hai tu chupaye hue.
chaddhi pehne, khate hue paan,
poori dilli se alag hai gulati ji ki shaan!
What a super Gainda fool!!
Kya baat hai sir jee....hummm...
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