सब नश्वर है, सब खत्म हो जाता है, कुछ अगर नहीं जाता है तो बस दर्द नहीं जाता है
बीज पैदा होता है, पौधा बनता है, पौधा पेड़ और फ़िर वो चला जाता है
इंसान आता है, बड़ा होता है और फ़िर वो भी चला जाता है
कुछ अगर नहीं जाता है तो बस दर्द नहीं जाता है - वो हमेशा रहता है
आज मुझको, कल तुमको, फ़िर किसी और को
उसकी ना शक्ल है, ना सूरत, ना रूप ना कोई रंग
ना सामने दिखता है, ना पास बैठकर बात करता है
सिर्फ़ महसूस होता है – किसी को कम, किसी को बहुत सारा महसूस होता है
किसी का कुछ छीन लेता है तो किसी को कुछ दे जाता है
ज़्यादा वक्त के लिए जाता नहीं है कहीं, बस कभी कभी तुम्हारे पास ही आराम कर लिया करता है, फ़िर जाग जाता है और अपनी मौजूदगी दर्ज कराता है, महसूस कराता है
तुम्हारा कभी कोई सपना टूटे, कभी तुम्हारा कोई अपना छूटे
तो दर्द तुम्हारे पास कभी सीने का खंजर, कभी आँख का आंसू बनकर आ जाता है
कभी वो पहले भी आता है - तुम्हारे सपने चूर करता है, उम्मीदें खोखली करता है और फ़िर जब तुम्हारे पास कुछ नहीं रहता तो सिर्फ़ दर्द रह जाता है
सब नश्वर है, सब खत्म हो जाता है, कुछ अगर नहीं जाता है तो बस दर्द नहीं जाता है...
5 comments:
Sahi hai bhai - Kya "dard" hai!
hehe, nice man. you should take sometime off to pursue this..
Amazing personification of 'Dard'
दर्द का इतना मोह रखते हो तो दर्द तुम्हे क्यों छोड़ जायेगा?
दर्द की ही आस है तो वोह तुम्हारे पास ही आएगा|
ज़रा दर्द का दामन छोड़, ज़िन्दगी को बुला के देखो
अपने मन में उम्मंग की तरंग जगा कर तो देखो|
यह आकाश, यह धरती, यह नदिया खिलखिला रही है
तुम्हे ख़ुशी अपनी ओर बुला रही है...
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